सरकार के एक साल,सामने आने लगा अंदरुनी बवाल !

06 Apr 25 6

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Description
क्या मोहन सरकार में सब कुछ ठीक ठाक है?
या फिर आपसी स्वार्थों की आंच में गुटबाजी तेजी से उलबले लगी?

वैसे तो मोहन सरकार को आकार लिए ठीक एक साल हो चला है।
  दिसंबर के इसी माह में आलाकमान के आशीष पर अचानक सीएम का ताज मोहन यादव के सिर पर जा पहुंचा। 
     पत्ता कट गया, बड़े बड़े उन नेताओं का जो आशाओं के आसमान पर सिर उठाए खड़े थे।
मंत्री प्रहलाद पटेल तो इतने आशान्वित थे कि ढोलो की थाप पर मिठाई भी बंटाना शुरू कर दिया था। 
कैलाश विजयवर्गीय से लेकर राकेश सिंह, नरेंद्र सिंह तोमर, सुमेर सिंह सोलंकी से लेकर अन्य नेताओं के दिल में जमकर उत्साह जगा था।
सब कुछ पानी हो गया। आलाकमान की सोच के आगे सब कुछ ठंडा पड़ गया।
   सियासत का गणित समझ आखिरकार सब, मन मारकर मंत्री बन लिए लेकिन अब अंदर के ख़लिश,  विरोध के स्वर में गूंजने लगी हैं।
    हालिया कैबिनेट बैठक में उज्जैन की सड़कों को लेकर मामला गर्मा गया।
 कैलाश ने मोर्चा खोला तो प्रहलाद पटेल ने भी अपने सुर मिला दिए। 
 हालांकि मामला चंद तर्कों के साथ शांत हो गया लेकिन गुटबाजी और विरोध की मुहिम का खुलकर आगाज जरूर हो गया। 
   साथ ही आपसी संकोच या फिर लिहाज का पर्दा तार तार हो गया। 
   वहां शिवराज भी वापिसी के सपनों को पंख देने के जुगत में तेजी से जुट गए हैं। 
    साफ है कि, मौजूदा सरकार के लिए आने वाला वक्त आसान नहीं होने वाला है। उपलब्धियों के दबाव के साथ सियासी गणित को बैठाना...एक बड़ी चुनौती से कम नहीं होगा।